पधर (मंडी),हिमशिखा न्यूज़।09/02/2023
काष्ठकला से देव पशाकोट का करालडी मंदिर बनकर तैयार,मंदिर का प्रतिष्ठा समारोह कल
पधर उपमंडल की उरला पंचायत के करालडी गांव में स्थित देव पशाकोट के काष्ठकला से नवनिर्मित सुंंदर भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया है। शुक्रवार को मंदिर में धार्मिक समारोह का आयोजन होगा। इस आयोजन में चौहारघाटी के बड़ादेयो राजा हुरंग नारायण बतौर मुख्यतिथी शिरकत करेंगे। पहाड़ी वजीर देव पशाकोट राजा हुरंग नारायण का स्वागत करेंगे। पधर के इलाका रुहाड़ा नरेश देव सूत्रधारी ब्रम्हा भी इस देव समारोह में मेहमान देवता के रूप में शिरकत करेंगे। करालडी गांव को देव पशाकोट की पादुका स्थली के नाम से भी जाना जाता है। बड़ादेयो हुरंग नारायण भगवान बिष्णु अवतार हैं तो देव पशोकोट को भगवान शिव का गद्दी रूप माना जाता है। हस्तपुर चौहारघाटी में दोनों देवताओं को राजा और पहाड़ी वजीर के नाम से पुकारा जाता है।
श्रद्धालुओं के सहयोग से नव निर्मित मंदिर के निर्माण पर 80 लाख की राशि व्यय की गई है। इस सुंदर मंदिर में काष्ठ कला की निकासी जिला मंडी की सराजघाटी के प्रमुख कारगीर राम लाल ठाकुर सहित उनके 13 सहयोगियों द्वारा की गई है। एल साल के लंबे अंतराल के बाद मंदिर का निर्माण कार्य कारगीरों द्वारा पूरा किया गया है। मंदिर कमेटी प्रधान एवं पुजारी पुर्ण चंद ने बताया आम श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर का भव्य निर्माण कार्य संपन्न हुआ है। उन्होंने बताया कि मंदिर में प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन शुक्रवार को आयोजित होगा। समारोह में देव हुरंग नारायण, देव पशाकोट, देव सूत्रधारी ब्रम्हा भी शिरकत करेंगे। अन्य देवताओं के कारदारों और मंदिर निर्माण के सहयोगियों को भी मंदिर कमेटी की ओर से निमंत्रण भेजा गया है, जो सभी समारोह के साक्षी बनेंगे। उन्होंने बताया कि
शुक्रवार को मंदिर के प्रतिष्ठा समारोह में चौहारघाटी नरेश बड़ादेयो हुरंग नारायण मुख्यतिथी देवता के रूप में शिरकत करेंगे। घाटी वजीर देव पशाकोट देव परंपरा अनुसार उनका अपने मंदिर में पहुंचने पर स्वागत करेंगे। इस दौरान सैंकड़ों की तादात में श्रद्धालु तीनों देवताओं के देव समागम के साक्षी बनेंगे। उन्होंने कहा कि तीनों देवताओं के रथ एक साथ नव निर्मित मंदिर में विराजेंगे। शनिवार को मंदिर में विशाल भंडारे का आयोजन होगा। इसी दिन देव हुरंग नारायण, देव पशाकोट का रथ महाशिवरात्रि उत्सव में शिरकत करने के लिए पधर क्षेत्र के गांवों से होते हुए देवलुओं के साथ पैदल कूच करेंगे। वहीं देव सूत्रधारी ब्रम्हा सुराहण अपने मंदिर के लिए वापिस रवाना होंगे। इलाका रूहाड़ा नरेश शिवरात्रि पर्व में हिस्सा नहीं लेते। ऐसे में अब देव ब्रम्हा दोनों देवताओं के साथ प्रथम अप्रेल से शुरू होने वाले लघु शिवरात्रि मेला जोगिंदरनगर की शोभा बढ़ाएंगे। पूर्ण चंद ने बताया कि मंदिर के निर्माण में सराज घाटी के कारागारों ने अहम भूमिका निभाई, जिन्हें सभी देवताओं के सानिध्य में मंदिर कमेटी सम्मानित करेगी।