डाडासीबा,हिमशिखा न्यूज़।22/05/2022
व्यवस्था परिवर्तन से ही होगा अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का भला-संजय पराशर
जन सरोकारों के लिए धरातल पर काम करने की आवश्यकता
कैप्टन संजय पराशर ने कहा है कि देश की आजादी के 75 वर्ष बाद हमने विकास के कई मील के पत्थर तय कर लिए हों, लेकिन फिर भी समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए आज भी धरातल पर काम करने की जरूरत है। जसवां-परागपुर क्षेत्र के बठरा गांव में जन संवाद कार्यक्रम में पराशर ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सामाजिक सुरक्षा पाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। सरकार की तरफ़ से इस दिशा में कई योजनाओं को हर साल आकार दिया जाता है, लेकिन गरीब आदमी की बेवसी होती है कि
सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतरने के लिए शायद उसे बड़े संयम व धैर्य के साथ इंतजार करना पड़ता है। संजय ने कहा कि उन्होंने क्षेत्र की हर पंचायत का दौरा करने के पश्चात यह पाया है कि अगर कोई व्यक्ति बीमारी या दुर्घटना के कारण एक बार बिस्तर पर पड़ जाए, तो वह पूरी तरह से लाचार हो जाता है। सिस्टम के हाथों मजबूर ऐसे व्यक्ति को खुद या परिवार को सम्हालना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसी तरह अगर किसी व्यक्ति की असमय मौत हो जाए तो उसकी पत्नी को पेंशन लगवाने के लिए कसरत करनी पड़ती है। जबकि सच यह है कि जब मृत्यु प्रमाण पत्र दिया जाता है तो पेंशन का प्रावधान भी उसी समय हो सकता है। संजय ने कहा कि अगर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की कहीं दिक्कत है तो उसके हल के लिए भी इंतजार करना पड़ता है। ऐसी अनेकों समस्याएं हैं, जिनका सामना रोजमर्रा ग्रामीणों को करना पड़ता है। विडम्बना यह है कि इस अव्यस्था से सबसे ज्यादा गरीब आदमी आहत होता है। पराशर ने कहा कि गरीब व्यक्ति को योजनाओं के लाभ में देरी नहीं होनी चाहिए। पराशर ने कहा कि उनके मन में ऐसी समस्याओं को लेकर टीस उठती है। हालांकि व्यक्तिगत स्तर पर गरीबी उन्मूलन की दिशा में वह खुद काम कर रहे हैं। निराश्रित महिलाओं के लिए मासिक पेंशन का प्रावधान किया है तो आर्थिक रूप से अक्षम परिवारों के विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप और पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं। जन औषधि केन्द्रों के माध्यम से हर किसी को निःशुल्क दवाईयां उपलब्ध करवा रहे हैं। ऐसे में जन सरोकारों के लिए अब धरातल पर काम करने की आवश्यकता है और निःसन्देह आम जनमानस की तकलीफों को व्यवस्था परिवर्तन से ही दूर किया जा सकता है।