जुन्गा में विस्फोटक एवं फोरेंसिक विश्लेषण विषय पर दो दिवसीय सेमिनार आरंभ
शिमला । विस्फोटक एवं गोला-बारूद, सुरक्षा, हैंडलिंग और फोरेंसिक विश्लेषण विषय पर दो दिवसीय सेमिनार का बुधवार को निदेशालय फॉरेंसिक सेवाएं, जुन्गा में शुभारंभ हुआ । जिसका शुभारंभ हिमाचल प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) के0के0. पंत ने वर्चुअल माध्यम से किया गया।
अपने संबोधन में उन्होंने फॉरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा विस्फोटक एवं गोला-बारूद से संबंधित मामलों के सुरक्षित तथा उचित हैंडलिंग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने राज्य में हाल ही में हुए विस्फोटक से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए, जिसमें 1 जनवरी 2026 को नालागढ़ में हुई घटना भी शामिल है । उन्होने कहा कि फॉरेंसिक विशेषज्ञों को घटनास्थल से भौतिक साक्ष्यों के संग्रहण और संरक्षण के संबंध में गहन जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है।
विस्फोटक एवं गोला-बारूद के क्षेत्र के दो प्रख्यात विशेषज्ञ डॉ0 ओंकार एस मोंधे, पूर्व महाप्रबंधक, भारतीय आयुध निर्माणी, बदमाल (ओडिशा) तथा देवब्रत मलिक, पूर्व महाप्रबंधक, भारतीय आयुध निर्माणियां ने विस्फोटक सामग्री से संबधित विशेष जानकारी दी गई । डॉ. मोंधे ने विस्फोटक एवं प्रोपेलेंट का परिचय, उत्पादन विधियां, विस्फोटकों की थर्मोकेमिस्ट्री, विभिन्न आरंभिक विधियां तथा फॉरेंसिक विश्लेषण की विधियां विषयों पर व्याख्यान दिया जाएगा। जबकि सेमिनार में डॉ0 मलिक द्वारा विस्फोटकों के गुण एवं डिटोनेशन, वाणिज्यिक विस्फोटक, सुरक्षा, यूएनएचडी, क्वांटिटी डिस्टेंस, कम्पैटिबिलिटी ग्रुप्स, इनसेंसिटिव म्यूनिशन्स तथा इंटरनल बैलिस्टिक्स” विषयों पर जानकारी दी जाएगी।
इस अवसर पर निदेशक फॉरेंसिक सेवाएं, डॉ. मीनाक्षी महाजन ने अतिथि वक्ताओं को सम्मानित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विस्फोटक एवं गोला-बारूद की सुरक्षा तथा हैंडलिंग से संबंधित प्रशिक्षण फॉरेंसिक विशेषज्ञों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सेमिनार फॉरेंसिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का अभिन्न हिस्सा हैं तथा निदेशालय द्वारा फॉरेंसिक विशेषज्ञों, पुलिस के जांच अधिकारियों, अभियोजन अधिकारियों, चिकित्सा अधिकारियों तथा सशस्त्र सीमा बल के कार्मिकों के ज्ञान को अद्यतन रखने के लिए समय-समय पर सेमिनार, कार्यशालाएं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
इस सेमिनार में राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, जुन्गा, क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं धर्मशाला एवं मंडी तथा जिला फॉरेंसिक इकाइयों बद्दी, बिलासपुर और नूरपुर के फॉरेंसिक विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।