एचपी शिवा परियोजना से हिमाचल में बागवानी का हो रहा व्यापक विस्तार
4,000 हेक्टेयर क्षेत्र के अंतर्गत 3,500 किसान-बागवान होंगे लाभान्वित
प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बागवानी क्षेत्र प्रमुख आधार स्तंभ है। राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों और बागवानों द्वारा प्रगतिशील विकास कार्यक्रमों को अपनाने से पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राज्य सरकार ने वैज्ञानिक पद्धतियों, आधुनिक बुनियादी ढांचे, जलवायु-अनुकूल तकनीकों और बेहतर मार्केट पहुंच के जरिए बागवानी क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए किसान-बागवान केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया है। पिछले तीन वर्षों में बागवानी विभाग द्वारा किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादकता में सुधार और राज्य में सतत बागवानी पद्धतियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कई प्रमुख कार्यक्रम कार्यान्वित किए जा रहे हैं।
बागवानी में विविधता और विस्तार के लिए एकीकृत बागवानी विकास मिशन के अंतर्गत लगभग 870 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को बागीचों, हाइब्रिड सब्जियों और मसालों की खेती के दायरे में लाया गया है, जिससे लगभग 300 किसान-बागवान लाभान्वित हुए हैं।
इसके अतिरिक्त एवोकैडो, ब्लूबेरी और ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च मूल्य फलों की फसलों की खेती का प्रदर्शन करने के लिए सात फ्रंट लाइन प्रदर्शन स्थापित किए गए हैं। एचपी शिवा परियोजना के अंतर्गत लगभग 4,000 हेक्टेयर क्षेत्र को उच्च-घनत्व वाले बागीचों के दायरे में लाया जा रहा है, जिससे लगभग 3,500 किसान-बागवान लाभान्वित होंगे।
संरक्षित खेती के महत्व को समझते हुए प्रदेश सरकार ने ग्रीनहाउस फार्मिंग का विस्तार किया है। पिछले तीन वर्षों में एकीकृत बागवानी विकास मिशन और हिमाचल प्रदेश कृषि विकास योजना के अंतर्गत लगभग 16 करोड़ रुपये के निवेश से पॉलीहाउस के जरिए लगभग 1.89 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र को कवर किया गया है, जिससे लगभग 900 किसान-बागवान लाभान्वित हुए हैं।
इस पहल ने किसानों-बागवानों को वर्ष भर उच्च मूल्य वाली सब्जियों और फूलों की खेती करने में सक्षम बनाया है और साथ ही उत्पादकता और आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है।
प्रदेश सरकार ने बागवानों को मौसम से होने वाले नुकसान से बचाने को उच्च प्राथमिकता दी है। पिछले तीन वर्षांे में लगभग 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र को एंटी-हेल नेट के दायरे में लाया गया है जिससे 6,454 किसानों को लगभग 44 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का लाभ मिला है। इन उपायों ने बारिश-ओलावृष्टि से फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया है और बागवानों के लिए बेहतर आय सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।
अलग-अलग बागवानी विकास योजनाओं के तहत लगभग 39 करोड़ रुपये के निवेश से करीब 12,739 किसानों को पावर टिल्लर, पावर स्प्रेयर और खेतीबाड़ी के लिए अन्य मशीनरी खरीदने के लिए सब्सिडी प्रदान की गई है। खेती के आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल से बागीचों में मजदूरों पर निर्भरता कम हुई है और काम करने की क्षमता बढ़ी है।
बागवानी विभाग ने बीते तीन वर्षों में लगभग 4.24 करोड़ रुपये के निवेश से 53 मशरूम उत्पादन और खाद (कम्पोस्ट) बनाने वाली यूनिटें शुरू की हैं। इन यूनिटों से किसाना-बागवानोें और ग्रामीण उद्यमियों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध हुए हैं।
राज्य सरकार ने फसल कटाई के बाद के प्रबंधन और मूल्य वर्द्धित अधोसंरचना को सुदृढ़ करने पर भी ध्यान केन्द्रित किया है। लगभग 11.44 करोड़ रुपये से निजी क्षेत्र सेक्टर में चार कोल्ड रूम, दो कोल्ड स्टोरेज यूनिट, दो ग्रेडिंग लाइन और दो फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू की गई हैं। ये सुविधाएं फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, उत्पाद की गुणवत्ता को सुधारने और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं।
पानी का सही प्रबंधन प्रदेश सरकार की मुख्य प्राथमिकता है। श्पर ड्रॉप, मोर क्रॉपश् स्कीम के तहत लगभग 2,000 हेक्टेयर भूमि को सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के दायरे में लाया गया है। इससे लगभग 10.70 करोड़ रुपये के निवेश से 2,185 किसान लाभान्वित हुए हैं। पानी की किफायत करने वाली इन तकनीकों से सतत बागवानी और जलवायु परिवर्तन का सामना करने की क्षमता बढ़ी है।
हिमाचल प्रदेश सरकार का ध्येय है कि बागवानों को आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, वैज्ञानिक परामर्श, सुदृढ़ विपणन व्यवस्था तथा आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाकर बागवानी को अधिक लाभकारी, सतत एवं प्रतिस्पर्धी बनाया जाए। सरकार की किसान-बागवान केंद्रित नीतियों एवं दूरदर्शी पहलों के परिणामस्वरूप प्रदेश का बागवानी क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छू रहा है और बागवानों की आमदनी में आशातीत वृद्धि हो रही है।