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हिमाचल प्रदेश में हालिया आपदा से प्रभावित लोगों को अब बैंकों से भी राहत मिलने का रास्ता खुल गया है। प्रदेश के लाखों ऋणधारकों को सहारा देने के लिए बैंक विशेष राहत पैकेज लाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए शिमला में हुई राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की है, जो एक हफ्ते के भीतर प्रस्ताव तैयार करेगी।

बैठक में कृषि, एमएसएमई और अन्य क्षेत्रों के प्रभावित ग्राहकों के ऋणों का पुनर्गठन करने पर सहमति बनी। मुख्य सचिव ने कहा कि आपदा के कारण कई लोगों की भुगतान क्षमता प्रभावित हुई है, इसलिए बैंकों को पुनर्निर्धारण (Rescheduling) के जरिए राहत देनी होगी।

कितने लोग प्रभावित?

  • 6.5 लाख से ज्यादा कृषि खाते
  • करीब 2 लाख एमएसएमई खाते
  • लगभग 8 लाख अन्य खाते

इन सभी को राहत पैकेज से फायदा मिल सकता है।

राहत पैकेज की प्रमुख बातें

  • पुनर्गठित ऋणों पर 1 वर्ष तक स्थगन अवधि (Moratorium)
  • कोई अतिरिक्त ब्याज या पेनल्टी नहीं
  • कोई नई जमानत या गारंटी की मांग नहीं होगी
  • जिन किसानों की फसल का नुकसान 33% से ज्यादा हुआ है, उन्हें पुनर्गठन का लाभ मिलेगा
  • फसल ऋण को टर्म लोन में बदला जा सकेगा
  • 33-50% नुकसान पर 2 साल में पुनर्भुगतान (1 वर्ष मोरेटोरियम सहित)
  • 50% से ज्यादा नुकसान पर 5 साल में पुनर्भुगतान (1 वर्ष मोरेटोरियम सहित)

इसके अलावा, एमएसएमई, रिटेल और अन्य सेक्टरों के कर्जदारों को भी पुनर्गठन की सुविधा दी जाएगी। राहत के बाद भी ऐसे ऋण स्टैंडर्ड एसेट की श्रेणी में ही रखे जाएंगे।

बैठक में वित्त सचिव अभिषेक जैन, यूको बैंक सीईओ एमडी अश्वनी कुमार, नाबार्ड सीजीएम विवेक पठानिया समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।

By HIMSHIKHA NEWS

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