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शिमला,हिमशिखा न्यूज़। 18/11/2021 ​

82वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के
समापन अवसर पर माननीय अध्यक्ष श्री विपिन सिंह परमार का
स्वागत भाषण।

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर
पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के चेयरमैन एवं लोक सभा के
अध्यक्ष ओम बिरला , केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा युवा सेवाऐं खेल
मंत्री अनुराग ठाकुर , राज्य सभा के उप सभापति
हरिवंश , विधान सभा के उपाध्यक्ष डॉ0 हंस राज , विभिन्न
राज्यों की विधान परिषदों/ विधान सभाओं के पीठासीन अधिकारी व उप-
पीठसीन अधिकारी, मंत्रीपरिषद के सदस्यगण, विधायकगण, लोक सभा व राज्य
सभा के महासचिव, सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के सचिव, विशिष्ट अतिथिगण
तथा राष्ट्रीय व प्रदेश के हमारे सम्मानित पत्रकार बन्दुओं। आप का मैं आज के
समापन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए तह दिल से आभार करता हूं। विशेषकर
आज इस कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के माननीय राज्यपाल महोदय, लोक सभा
के अध्यक्ष तथा केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर आप सभी की
उपस्थिति ने हम सभी को अभिभूत तथा प्रसन्नतित किया है।
आज से 100 वर्ष पूर्व 14 व 16 सितम्बर, 1921 को जब भारत अग्रेंजों की
हकुमत के अधीन था, शिमला में पहला अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों
का सम्मेलन आयोजित किया गया था तब शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की
होगी कि इसका शताब्दी समारोह भी होगा और शिमला में होगा। इस सम्मेलन
के शताब्दी समारोह के आयोजन का हिस्सा बनने पर हम सभी सौभाग्यशाली है
और खासकर मैं अपने आप को बहुत ही सौभाग्यशाली समझता हूं कि मेरे
अध्यक्ष काल में यह कार्य समापन की ओर अग्रसर है।

16 नवम्बर, 2021 को इसी सदन में सचिवों का 58वां सम्मेलन आयोजित
किया गया जिसमें 23 राज्यों की विधान परिषदों तथा विधान सभाओं के
सचिवों ने भाग लिया तथा इस कार्यक्रम में लोक सभा तथा राज्य सभा के
महासचिवों ने भी शिरकत की। इस सम्मेलन में चार महत्वपूर्ण विषयों क्रमश:

सदन में वाद-विवाद तथा चर्चा को और उपयोगी बनाने हेतु सदस्यों का
क्षमता निर्माण 2. समिति की ऑनलाईन बैठक सदन की आवश्यकता, चुनौतियां
और आगे का रास्ता 3. प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों में एकरूपता रखने की
आवश्यकता 4. विधानमंण्डलों के विशेषाधिकार सूचना का अधिकार
अधिनियम के तहत दायित्व पर विस्तृत चर्चा की गई। अब देश डिजिटल इंडिया
की ओर बढ रहा है तथा नवीनतक तकनीकों का हर जगह इस्तेमाल किया जा
रहा है। कागज के बोझ से निजात मिले, कार्य में दक्षता तथा पारदर्शिता आये
तथा सभी को सूचना शीध्र मिले यह आज कि प्राथमिकता बन गई है हम सभी
को भी इस दिशा में आगे बढ़ना होगा ताकि हम समृद्ध भारत निर्माण में अपना
योगदान दे सकें।
शिमला में यह सातवां सम्मेलन है इससे पूर्व छ: सम्मेलन शिमला में आयोजित
किये जा चुके है। प्रथम सम्मेलन क्योंकि शिमला में आयोजित किया गया था
इसलिए उसे सुस्मरण करने के लिए इस आयोजन को शिमला में कराने का
ऐतिहासिक निर्णय श्री ओम बिरला जी ने लिया है हालांकि मेरा निवेदन इसे
धर्मशाला में कराने का था वहां भी हिमाचल प्रदेश विधान सभा का तपोवन में
अपना भवन है।
पिछले कल पीठासीन अधिकारियों के शताब्दी वर्ष समारोह तथा 82वें अखिल
भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन को जहां देश के
नरेन्द्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से सम्बोधित कर हमे अपने कर्तव्य के प्रति
सचेत तथा निष्ठा रखने के लिए प्रेरित कर हम सभी का मार्ग प्रशस्त किया

वहीं इस सम्मेलन का शुभारम्भ अध्यक्ष लोक सभा ओम बिरला
द्वारा किया गया तथा हमें अपने दायित्व को और जिम्मेदारी के साथ निभाने के
लिए प्रेरित किया।
इस सम्मेलन में 24 राज्यों के पीठासीन अधिकारी तथा 5 राज्यों के उप-
पीठासीन अधिकारियों समेत 300 से भी ज्यादा अतिथियों ने भाग लिया तथा
पिछले कल की कार्यसूची में सम्मिलित दो महत्वपूर्ण विषयों क्रमश: 1. शताब्दी
यात्रा समीक्षा और भविष्य के लिए कार्य योजना 2. पीठासीन अधिकारियों का
संविधान, सदन और जनता के प्रति दायित्व पर सभी पीठासीन तथा उप
पीठासीन अधिकारियों द्वारा चर्चा की गई । हमारे लिए देश का लोकतंत्र तथा

संविधान सर्वोपरि है तथा भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, हम लोकतंत्र
की कैसे रक्षा करें तथा कार्य में कैसे निपूणता लायें इन विषयों को गम्भीरता से
लेना होगा तथा लोकतंत्र प्रणाली में जनता जो दायित्व हमें सौंपती है उस
दायित्व का हम कैसे निर्वहन करें ताकि हम अपने आप को जनता की अपेक्षाओं
के हिसाब से खरा उतार सकें।
ऐसे सम्मेलनों के आयोजनों से जहां हम एक दूसरे से मेल-मिलाप कर पातें हैं
वहीं हम इस देश की समृद्ध संस्कृति को भी जानने का अवसर पाते हैं। चर्चा के
माध्यम से जहां हम एक दूसरे राज्यों के कार्यक्रमों, योजनाओं तथा आर्थिकी को
जानने का प्रयास करते हैं वहीं एक दूसरे की समस्याओं के निवारण का रास्ता भी
खोज सकते हैं। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तथा गुजरात से लेकर गुवहाटी
तक भारत एक अखण्ड देश है। ऐसे आयोजन से एकता और भी प्रगाढ़ तथा प्रबल
होती है। मुझे आशा है कि शिमला में पीठासीन अधिकारियों का यह आयोजन
इस दिशा में एक अहम तथा महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। शिमला एक
महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है। यहां का वातावरण तथा शुद्ध हवा
जहां हमें शारीरिक रूप से मजबुत तथा दिमागी तौर से सशक्त बनाती है

वहीं यहां के रमणीय तथा मनमोहक पर्यटन स्थल हमारे जहन में सदैव
अविस्मरणीय रहेंगे ऐसी मैं आशा करता हूं। हमने प्रयास किया है कि आप सभी
का ठीक से ध्यान रख पायें तथा सांस्कृतिक संध्या का आयोजन कर आप को
हिमाचल प्रदेश की संस्कृति से रूबरू करा सकें व शिमला के ऐतिहासिक एवं
रमणीय पर्यटक स्थलों का भ्रमण करा सकें। अगर ऐसे प्रयासों में कोई कोताही या
कमी रही होगी उसके लिए मैं आपका क्षमा प्रार्थी हूं।
मैं एक बार पुन: फिर से मंच पर विराजमान महानुभावों का तथा इस कार्यक्रम
में मौजूद सभी विशिष्ट अतिथियों का फिर से अभिनन्दन, स्वागत तथा
इस्तेकबाल करता हूं और आशा करता हूं कि अपने-अपने गतंव्य की ओर रवाना
होने से पूर्व आप सभी एक अविस्मरणीय अनुभव लेकर जायेंगे।

By HIMSHIKHA NEWS

हिमशिखा न्यूज़  सच्च के साथ 

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