धर्मशाला,हिमशिखा न्यूज़।23/11/2021
पूर्व मंत्री एवं अखिल भारतीय कांग्रेस के सचिव सुधीर शर्मा ने मुख्य मंत्री जयराम ठाकुर के उस बयान को हास्यास्पद बताया जिसमें उन्होंने ये कहा है की कांगड़ा जिला को काट कर छोटे ज़िले बनाए जाएंगे उन्होंने कहा आज के दौर में जब संचार क्रांति इतनी ज़्यादा प्रगति कर चुकी है और कोरोना काल ने हमें ये सिखाया है की वर्क फ़्रॉम होम भी एक कॉन्सेप्ट है। ऐसे समय में जय राम ठाकुर और ज़्यादा प्रशासनिक इकाइयां बनाने की बात कर रहे मुख्यमंत्री को चाहिए कि वह अपने प्रशासनिक सेवाओं को IT के माध्यम से इतना मज़बूत करें कि प्रदेश के हर नागरिक को छोटे व बड़े काम चाहे वो राजस्व संबंधी काग़ज़ात हों, जन्म और मृत्यु पंजीकरण हों, या अन्य दस्तावेज़ हों वह ऑनलाइन उपलब्ध हो सकें जिससे की उसको जिला मुख्यालय तक न जाना पड़े।
जितनी ज़्यादा प्रशासनिक इकाइयाँ बनेंगी उतना ज़्यादा बोझ प्रदेश की आर्थिकी पर पड़ेगा आज मुद्दा ये नहीं है कि हम कितने ज़िले बनाते हैं चिंताजनक बात यह है की बढ़ती महँगाई और बेरोज़गारी से हम प्रदेश की जनता को कैसे राहत देंगे वहीं प्रदेश में सड़कें,स्वास्थ्य, शिक्षा और बिजली के ढांचे को और मज़बूत करके कैसे आम जन को लाभ दे पाएंगे। केवल मात्र राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए तो ये ठीक है की नयी प्रशासनिक इकाइयाँ बनाएँगे लेकिन इसका बोझ जो प्रदेश पर पड़ेगा उसका ज़िम्मेवार कौन होगा।
जो प्रदेश क़र्ज़ा लेकर कर्मचारियों को वेतन दे रहा हो उस प्रदेश में इस प्रकार की सोच प्रदेश को अंधकार की तरफ़ धकेलने वाली है क्या मुख्यमंत्री मंडी जिला के भी 3 ज़िले बनाएंगे और जहाँ जहां से माँग आएगी वहाँ भी ज़िले बनाएंगे कांगड़ा प्रदेश का गौरव है और सबसे बड़ा जिला है कांगड़ा ज़िले के विभाजन को कांगड़ा की जनता कभी सहन नहीं करेगी पहले भी कई बार प्रयास होते रहे हैं लेकिन कांगड़ा की भावनाओं को समझते हुए पहले की सरकारों ने कभी भी इस प्रकार का क़दम नहीं उठाया।
अच्छा होगा मुख्यमंत्री अधिकारियों से जान लें कितना अतिरिक्त वित्तीय बोझ पर प्रदेश को ऐसी प्रशासनिक इकाइयाँ बनाने पर उठाना पड़ेगा।
ज़िले बनाने के बजाए निचले स्तर पर विभागों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों को भरने की आवश्यकता है जिस से की नीचे के स्तर पर ढाँचा मज़बूत हो ना की ऊपर के स्तर पर, केवल कुछ लोगों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए प्रदेश के हितों से खिलवाड़ क़तई मंज़ूर नहीं होगा।