शिमला,हिमशिखा न्यूज़ 10/04/2022
पारवो वायरस से कुत्ते बीमार -विभाग उपचार करने में लाचार
पारवो वायरस के कारण इन दिनों अधिकांश कुत्ते बीमार हो रहे हैं । जिससे निपटने के लिए जुन्गा क्षेत्र के पशुपालन अस्पतालों व औषधालयों में कोई पुख्ता प्रबंध नहीं है । अधिकांश पालतु कुत्ते उचित उपचार न मिलने के कारण काल का ग्रास बन चुंके हैं । आलम यह है कि कुत्तों के इलाज के लिए जुन्गा क्षेत्र के किसी भी पशु औषधालय में दवाएं उपलब्ध नहीं है । लोगों को अपने बीमार कुत्तों के उपचार के लिए बाजार से दवाएं खरीदकर लानी पड रही है । आवश्यकता पड़ने पर औषधालयों में पशुओं व कुत्तों में ड्रिप लगाने की कोई व्यवस्था नहीं है । यहां तक कि पशु औषधालय में कार्यरत फार्मास्सिटों को ग्लुकोज लगाने की भी ट्रेनिंग नहीं दी गई है जिसके चलते लोगों को अपने पशुओं को ड्रिप लगाने के लिए गाड़ियों में डालकर कोटी अथवा जुन्गा ले जाना पड़ता है ं। जिससे पशुपालकों को गाड़ी व दवाओं का बोझ वहन करना पड़ रहा है । पशुधन को बेहतर व गुणात्मक चिकित्सका सेवाएं प्रदान करने के सरकार के दावे धरालत में खोखले साबित हो रहे हैं ।
बता दें कि जुन्गा क्षेत्र की 12 पंचायतों में करीब 20 हजार गौवंश, भेड़ बकरियां, कुक्कट व पालतु कुत्ते हैं । जिनके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए केवल दो चिकित्सक कोटी व जुन्गा में कार्यरत है । इसके अतिरिक्त सतलाई, पीरन, बलोग, भड़ेच में पशु औषधालय कार्यरत है । सतलाई में भी फार्मास्सिट का पद रिक्त लंबे अरसे से रिक्त चल रहा है जिसके चलते इस क्षेत्र का कार्यभार भी पीरन के फार्मास्सिट को दिया गया है । इन पंचायतों के लोगों को अपने पशुओं का इलाज करवाने के लिए करीब 40 से 45 किलोमीटर का सफर तय करके कोटी अथवा जुन्गा जाना पड़ता है । वर्ष 2020 के दौरान सीएम के जुन्गा प्रवास के दौरान पशु औषधालय पीरन का दर्जा अस्पताल किए जाने बारे आग्रह किया गया था परंतु आजतक पीरन औषधालय का दर्जा नहीं बढ़ पाया। आलम यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के औषधालयों में पशुधन के लिए पर्याप्त दवाएं भी उपलब्ध नहीं है । जिसके चलते पशुधन मालिकों को अधिकांश दवाएं बाजार से खरीद कर लानी पड़ती है ।
उप निदेशक पशुपालन विभाग शिमला डाॅ0 सुनील चैहान ने बताया कि बजट के अनुरूप प्रत्येक अस्पताल व औषधालय में दवाईयां उपलब्ध करवाई जाती है । इन्होने माना कि इन दिनों कुत्तों में पारवो वायरस का प्रकोप चल रहा है और उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार उपचार भी किया जा रहा है । उन्होने बताया कि शिमला जिला में 94 पद फार्मास्सिट के रिक्त पड़े हैं जिस