पंचायतों के चुनाव बार बार टाल कर लोकतंत्र का गला घोंट रही सुक्खु सरकार -भाजपा
लोकतंत्र में सरकारें हठधर्मिता से नहीं अपितु लोकराज से चलती है
शिमला 07 फरवरी । हिमाचल प्रदेश की सुक्खु सरकार ने पंचायतों के चुनाव बार बार टाल कर लोकतंत्र का गला घोंट दिया है जिससे प्रतीत होता है कि सुखबिंद्र सिंह सुक्खु अब मुख्यमंत्री नहीं अपितु एक तानाशाह बन गए है ।
यह आरोप शिमला जिला भाजपा अध्यक्ष केशव चौहान, जिला प्रवक्ता जितेन्द्र भोटका, सक्षम गुडिया बोर्ड की पूर्व उपाध्यक्षा रूपा शर्मा, राजेन्द्र सिंह झिन्ना, शशांक अत्री, रमेश शर्मा सहित अनेक भाजपा पदाधिकारियों नेें मिडिया को जारी संयुक्त बयान में लगाए हैं । इनका कहना है कि लोकतंत्र में सरकारें हठधर्मिता से नहीं बल्कि लोकराज से चलती है । सीएम सुक्खु ने पंचायतीराज चुनाव को टालने के लिए इसें अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना दिया है और माननीय हाईकोर्ट के आदेशों के विरूद्ध हिमाचल सरकार माननीय सुप्रीमकोर्ट पहूंच गई है जहां पर राज्य के लोगों का करोड़ों रूपये पंचायत चुनाव स्थगित करने के लिए व्यय किए जा रहे हैं । यह सब बातें कितनी प्रासंगिक है प्रदेश की जनता इस अच्छे से समझ गई है ।
केशव चौहान और जितेन्द्र भोटका ने कहा कि डिजास्टर के नाम पर आखिर कब तक चुनाव टाले जाएंगें एक न एक तो पंचायत चुनाव करवाने ही पड़ेगे। उन्होने तर्क दिया कि अतीत में जब प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में सड़कों व बिजली का अभाव था उस दौरान भी कभी चुनाव स्थगित नहीं हुए हैं । ऐसा प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश में सरकार नाम की कोई चीज नहीं रही है ।
इन्होने कहा कि सुक्खु सरकार के मंत्री अनेक मंचों से बार-बार यह कहकर ढोंग करते रहे कि हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज और स्थानीय निकायों के चुनाव निर्धारित समय पर करवाए जाएंगे परंतु अंदर खाते इन चुनाव को टालने का शड़यंत्र रचकर प्रदेशवासियों के साथ धोखा करते रहे। शिमला भाजपा ने कहा कि यह सरकार पंचायत चुनाव करवाना ही नहीं चाहती है। सुक्खू सरकार ने हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज और लोकतंत्र का पूरी तरह गला घोट दिया है और अब पंचायत चुनाव न होने के कारण प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास प्रक्रिया पूरी तरह से ठप्प होकर रह गई है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि जिस प्रकार सुक्खु सरकार समाज के हर वर्ग के साथ अन्याय कर रही है इसका खामियाजा आगामी वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा ।