राज्यपाल ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न को साकार करने के लिए उच्च शिक्षा को मज़बूत करने का किया आह्वान
हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से इनोवेशन, शोध एवं कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने का किया आग्रह
राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार किया जा सकता है। विश्वविद्यालय की अकादमिक एवं अनुसंधान गतिविधियों को और बेहतर ढ़ंग से चलाने के लिए निरन्तर प्रयासरत् रहने की आवश्यकता है, जिसके लिए हम सबको सामूहिक प्रयास करने चाहिए।
राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय कोर्ट की 36वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचार, नैतिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति, रोजगारपरक शिक्षा और उद्यमिता, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास, डिजिटल शिक्षा और तकनीकी सशक्तिकरण तथा अनुसंधान और नवोन्मेष जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। इससे पूर्व, उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित डिजिटल स्टुडियो/मॉक रिकॉर्डिंग स्टुडियो का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर दूरवर्ती संस्थान के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार ने राज्यपाल को स्टुडियो के महत्व और इसके माध्यम से शिक्षा के प्रसार की विस्तृत जानकारी दी।
राज्यपाल ने कहा कि शिमला विश्वविद्यालय न केवल हिमाचल बल्कि देश में उच्च शिक्षा, शोध और नवाचार का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होेंने बदलते परिप्रेक्ष्य में विश्वविद्यालय को शिक्षा की गुणवत्ता और अनुसंधान के स्तर को और अधिक सशक्त बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे पाठ्यक्रम विकसित किए जाने चाहिए जो न केवल सैद्धांतिक ज्ञान दें, बल्कि व्यावहारिक कौशल और नवाचार को भी प्रोत्साहित करें। राज्यपाल ने कहा, ‘‘वर्तमान युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और हरित प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता अनिवार्य होती जा रही है। विश्वविद्यालय को इन क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना चाहिए।’’
उन्होंने कोर्ट बैठक को नियमित तौर पर आयोजित करने तथा हर तीन माह में बैठक करने के निर्देश दिए। साथ ही, पुराने सभी ऑडिट पैरा को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते हुए प्रत्येक शिक्षक को एक गांव को गोद लेना चाहिए और उन्हेें पर्यावरण संरक्षण, आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए।
श्री कविंद्र गुप्ता ने कहा कि केवल तकनीकी और प्रबंधन शिक्षा ही नहीं, बल्कि नैतिक शिक्षा और भारतीय जीवन मूल्य भी हमारे शिक्षण का अभिन्न अंग होने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी प्राचीन शिक्षा परंपरा को आधुनिक संदर्भ में पुनः स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने प्रदेश में रोजगार की चुनौतियों को देखते हुए, विवविद्यालय को रोजगारपरक शिक्षा और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐेसे पाठ्यक्रम और कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करने चाहिए जो युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रेरित करें। इन्क्यूबेशन सेंटर, इंडस्ट्री-एकेडेमिया साझेदारी और इंटर्नशिप कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थी अधिक आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय को पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए। जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और कार्बन फुटप्रिंट घटाने जैसे क्षेत्रों में शोध और जागरूकता कार्यक्रम आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को ऑनलाइन शिक्षा, वर्चुअल कक्षाएं और डिजिटल पुस्तकालय जैसे संसाधनों को सुदृढ़ करना चाहिए। ई-लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग के माध्यम से शिक्षण को और अधिक सुलभ और प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक शोध सुविधाएँ और उद्योग-संस्थान सहयोग के माध्यम से विश्वविद्यालय को अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी पहचान और मजबूत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध अनुदान प्राप्त करने की दिशा में प्रयासरत रहना चाहिए। गुप्ता ने शिक्षकों और विवविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया कि वे अधिक समर्पण, अनुशासन और नवाचार की भावना के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली का लक्ष्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना होना चाहिए जो समाज और राष्ट्र की सेवा कर सकें।
गुप्ता ने शिक्षकों और विवविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया कि वे अधिक समर्पण, अनुशासन और नवाचार की भावना के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली का लक्ष्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना होना चाहिए जो समाज और राष्ट्र की सेवा कर सकें।
इससे पूर्व, विश्वद्यालय के कलपति प्रो. महावीर महावीर सिंह ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा गत वर्ष की विश्वविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में नए सृजित पांच केंद्रों जिनमें हरित ऊर्जा एवं नैनोटैक्नॉलोजी केंद्र, साइबर-फिजिकल सिस्टम पर कृत्रिम बुद्धिमता केंद्र, पहाड़ी संस्कृति एवं धरोहर, हिमालयन सेंटर फॉर डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड रेज़िलिएंस तथा भारतीय ज्ञान प्रणालियों और भारतीय गणित के लिए रामानुजन केंद्र के माध्यम से विश्वविद्यालय को एक अलग पहचान देने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन पर भी विस्तृत जानकारी दी गई। बैठक में विधायक सुरेश कुमार को सर्वसम्मति से कार्यकारी परिषद का सदस्य निर्वाचित किया गया। बैठक में विधायक हरीष जनार्था, सुरेश कुमार तथा चन्द्र शेखर ने भी अपने बहुमूल्य सुझाव दिए।
कुलसचिव ज्योति राणा ने कार्यवाही का संचालन किया तथा धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
शिक्षा सचिव श्री राकेश कंवर भी बैठक में उपस्थित थे।