डाडासीबा,हिमशिखा न्यूज़ 10/03/2022कैप्टन संजय आज उन हजारों विद्यार्थियों व युवाओं के लिए उम्मीद व प्रेरणा बन चुके हैं, जो जीवन में किसी मुकाम तक पहुंचना चाहते हैं हैं। पराशर द्वारा खाेले गए 18 इंग्लिश लर्निंग सेंटर्स में 1457 विद्यार्थी अध्ययनरत
-सुदूर गांवों में भी विद्यार्थियों के लिए घर-द्वार पर कंप्यूटर व अंग्रेजी सीखने की सुविधाअब ऐसे छात्रों को साधनों व मार्गदर्शन के अभाव में नहीं भटकना पड़ रहा है। भविष्य को लेकर संवेदनशील ऐसे विद्यार्थियों के लिए पराशर ने स्कॉलशिप से लेकर अपने कार्यालयों में निशुल्क कोचिंग व गाइंडेंस की व्यवस्था कर रखी है। तो अब कंप्यूटर व इंग्लिश सेंटरों के माध्यम से भी युवाओं को सीधा रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जसवां-परागपुर क्षेत्र के अठारह गांवों में फ्री इंग्लिश लर्निंग व कंप्यूटर सेंटर्स खाेले गए हैं, जहां निस्संदेह युवाओं व विद्यार्थियों के लिए निशुल्क कोचिंग व शिक्षा प्राप्त हो रही है। इन अठारह केन्द्रों में आसपास के 42 गावों के 1457 विद्यार्थी व युवा शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
दरअसल शिक्षा व रोजगार के विजन पर काम कर रहे पराशर का लक्ष्य है कि इस वर्ष एक हजार एक हजार युवाओं को एनडीए और मर्चेंट नेवी में रोजगार के साधनों का सृजन किया जाए। इसके लिए कैप्टन संजय युवाओं को हर क्षेत्र में प्रशिक्षित करना चाहते हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों की कंप्यूटर और अंग्रेजी भाषा कमजोर कड़ी रहते हैं और यही कारण होता है कि वे परीक्षा या साक्षात्कार में पिछड़ जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए संजय ने शिक्षा के इस बड़े प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है। मेहड़ा, दड़ब, कटोह-टिक्कर, रक्कड़, सलेटी, डाडासीबा, हलेड़, स्यूल, मेहड़ा, चटवाल, चौली, स्वाणा, चलाली, पीरसलूही, बठरा, नारी-घाटी, कस्बा कोटला और सांडा (रैल) में शानदार व सकारात्मक परिणाम आने के बाद जसवां-परागपुर क्षेत्र की हर पंचायत में शीघ्र ही ऐसे केन्द्र खोलने की योजना है। इन केन्द्राें में कंप्यूटर कोर्स उतीर्ण करने वाले विद्यार्थियों को टेली-ईआरपी का प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा, जबकि विद्यार्थियों से कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा। इसके अलावा युवाओं की प्रतिभा को तराशने और प्रशिक्षित करने के लिए निरंतर देश भर से विशेषज्ञों की टीम के साथ बेबीनार करने का भी प्लान तैयार किया है। विद्यार्थियों को दैनिक समाचार पत्र, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मासिक प्रतिकाएं और विज्ञाव अंग्रेजी विषयों की पुस्तकें भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं तो इंटरनेट व प्रिंटर की सुविधा होने के कारण भी अब बच्चे हर विषय को प्रशिक्षित स्टाफ की मौजूदगी में आसानी से समझ रहे हैं। विद्यार्थियों शगुन, ऋतिका, शगुन, महक, अभि, राहलु और श्रेया का कहना है कि पराशर द्वारा संचालित केन्द्र में स्कूल के होमवर्क के अलावा कंप्यूटर व अंग्रेजी भी सिखाई जा रही है और हर दिन किसी नए विषय पर जानकारी प्रदान की जाती है। अभिभावकों सुरेश शर्मा, मीना, सरिता, रवि, पूजा और राजेश ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को जब से इंग्लिश सेंटर में भेजना शुरू कर दिया है, तब से प्रतिभा में निखार साफ देखने को मिल रहा है। बिना किसी खर्च के साथ के गांव में बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिसके लिए वह पराशर का आभार जताते हैं। वहीं, संजय का कहना है कि युवा बहुत कुछ करना चाहते हैं। उन्हें सही मार्गदर्शन व मदद की जरूरत है। युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार पैदा करना और उन्हें गाइड करके खुद के पैरों पर खड़ा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है।
कैप्टन संजय आज उन हजारों विद्यार्थियों व युवाओं के लिए उम्मीद व प्रेरणा बन चुके हैं, जो जीवन में किसी मुकाम तक पहुंचना चाहते हैं हैं। पराशर द्वारा खाेले गए 18 इंग्लिश लर्निंग सेंटर्स में 1457 विद्यार्थी अध्ययनरत
-सुदूर गांवों में भी विद्यार्थियों के लिए घर-द्वार पर कंप्यूटर व अंग्रेजी सीखने की सुविधाअब ऐसे छात्रों को साधनों व मार्गदर्शन के अभाव में नहीं भटकना पड़ रहा है। भविष्य को लेकर संवेदनशील ऐसे विद्यार्थियों के लिए पराशर ने स्कॉलशिप से लेकर अपने कार्यालयों में निशुल्क कोचिंग व गाइंडेंस की व्यवस्था कर रखी है। तो अब कंप्यूटर व इंग्लिश सेंटरों के माध्यम से भी युवाओं को सीधा रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जसवां-परागपुर क्षेत्र के अठारह गांवों में फ्री इंग्लिश लर्निंग व कंप्यूटर सेंटर्स खाेले गए हैं, जहां निस्संदेह युवाओं व विद्यार्थियों के लिए निशुल्क कोचिंग व शिक्षा प्राप्त हो रही है। इन अठारह केन्द्रों में आसपास के 42 गावों के 1457 विद्यार्थी व युवा शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
दरअसल शिक्षा व रोजगार के विजन पर काम कर रहे पराशर का लक्ष्य है कि इस वर्ष एक हजार एक हजार युवाओं को एनडीए और मर्चेंट नेवी में रोजगार के साधनों का सृजन किया जाए। इसके लिए कैप्टन संजय युवाओं को हर क्षेत्र में प्रशिक्षित करना चाहते हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों की कंप्यूटर और अंग्रेजी भाषा कमजोर कड़ी रहते हैं और यही कारण होता है कि वे परीक्षा या साक्षात्कार में पिछड़ जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए संजय ने शिक्षा के इस बड़े प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है। मेहड़ा, दड़ब, कटोह-टिक्कर, रक्कड़, सलेटी, डाडासीबा, हलेड़, स्यूल, मेहड़ा, चटवाल, चौली, स्वाणा, चलाली, पीरसलूही, बठरा, नारी-घाटी, कस्बा कोटला और सांडा (रैल) में शानदार व सकारात्मक परिणाम आने के बाद जसवां-परागपुर क्षेत्र की हर पंचायत में शीघ्र ही ऐसे केन्द्र खोलने की योजना है। इन केन्द्राें में कंप्यूटर कोर्स उतीर्ण करने वाले विद्यार्थियों को टेली-ईआरपी का प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा, जबकि विद्यार्थियों से कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा। इसके अलावा युवाओं की प्रतिभा को तराशने और प्रशिक्षित करने के लिए निरंतर देश भर से विशेषज्ञों की टीम के साथ बेबीनार करने का भी प्लान तैयार किया है। विद्यार्थियों को दैनिक समाचार पत्र, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मासिक प्रतिकाएं और विज्ञाव अंग्रेजी विषयों की पुस्तकें भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं तो इंटरनेट व प्रिंटर की सुविधा होने के कारण भी अब बच्चे हर विषय को प्रशिक्षित स्टाफ की मौजूदगी में आसानी से समझ रहे हैं। विद्यार्थियों शगुन, ऋतिका, शगुन, महक, अभि, राहलु और श्रेया का कहना है कि पराशर द्वारा संचालित केन्द्र में स्कूल के होमवर्क के अलावा कंप्यूटर व अंग्रेजी भी सिखाई जा रही है और हर दिन किसी नए विषय पर जानकारी प्रदान की जाती है। अभिभावकों सुरेश शर्मा, मीना, सरिता, रवि, पूजा और राजेश ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को जब से इंग्लिश सेंटर में भेजना शुरू कर दिया है, तब से प्रतिभा में निखार साफ देखने को मिल रहा है। बिना किसी खर्च के साथ के गांव में बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिसके लिए वह पराशर का आभार जताते हैं। वहीं, संजय का कहना है कि युवा बहुत कुछ करना चाहते हैं। उन्हें सही मार्गदर्शन व मदद की जरूरत है। युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार पैदा करना और उन्हें गाइड करके खुद के पैरों पर खड़ा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है।