परागपुर,हिमशिखा न्यूज़। 09/11/2021
हिमाचल के तीन हजार सैनिकों ने अाजाद हिंद फौज में निभाया था अहम किरदार-डा. जीडी बख्शी
परागपुर में कैप्टन संजय द्वारा दो सौ सैनिक परिवारों के सदस्यों को किया गया सम्मानित
सुरक्षा विशेक्षज्ञ व रिटायर्ड मेजर जनरल डा. जीडी बख्शी ने कहा कि जंग-ए-आजादी में अपने लगभग 26 हजार सैनिकों का बलिदान देने वाली आज़ाद हिंद फौज में हिमाचल प्रदेश के तीन हजार से ज्यादा सैनिकों ने अहम किरदार निभाया था। हिमाचल के इन शूरवीरों की त्याग, तपस्या व बलिदान की कहानियां प्रदेश के कोने-कोने में मौजूद हैं। विशेष रूप से आजाद हिंद फौज के सैनिक तो जिला कांगड़ा, ऊना व हमीरपुर सहित हर तीसरे गांव में थे। 25 अगस्त 1944 को अंग्रेज सरकार ने मेजर दुर्गामल को लाल किले में फांसी पर चढ़ा दिया था, जो कि ‘आज़ाद हिंद फौज’ के ही सैनिक थे। मंगलवार को कैप्टन संजय पराशर द्वारा परागपुर में आजाद हिंद फौज के सैनिक परिवारों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें दो सौ स्वतंत्रता सेनानियों के सदस्यों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे डा. बख्शी ने कहा कि वह भी आजाद हिंद फौज के सैनिकों के सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। यह गौरव की बात है कि आज कैप्टन संजय के माध्यम से इन स्वतंत्रता सेनानी परिवारों से रूबरू होने का मौका प्राप्त हुआ। कहा कि भारत माता को पराधीनता की बेड़ियों से आजाद करवाने में आजाद हिंद फौज का अमूल्य योगदान था और उनके द्वारा इस विषय पर करवाए गए शोध और प्राप्त दस्तावेजों में भी यह बात सिद्ध हो चुकी है कि अंग्रेज आजाद हिंद फौज के डर से ही यहां से जाने को मजबूर हुए थे। बावजूद दुख इस बात है कि देश की स्वतंत्रता के इतने वर्ष बीत जाने के बाद आजाद हिंद फौज के बलिदानी सैनिकों के नाम पर कहीं पत्थर तक नहीं लग पाया है। हालांकि उन्होंने इसे लेकर सार्थक प्रयास किए और अब परिणाम यह है कि यह ऐतहासिक गलती जल्द सुधरने वाली है और भारत सरकार ने इन सैनिकों के लिए युद्ध संग्रहालय की स्वीकृति दे दी है। युद्ध संग्रहालय दिल्ली में बनकर तैयार होगा।
बख्शी ने पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि पड़ोसी देश कभी भी अपनी नाकाम हरकतों से बाज आने वाला नहीं है। साथ में चीन भी अपनी कुटिल चालें अक्सर चलता रहता है। बावजूद भारतीय सेना के हौसले भी इतने मजबूत हैं कि वो पड़ोसी देशों को कभी आईना दिखा सकते हैं। पाकिस्तान को बालाकोट में उसके घर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए हमारे जाबांज सैनिकों ने शौर्य का परिचय दिया था। कहा कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते, ऐसे में इसी अंदाज में भारतीय सेना जबाव देना भी जानती है। पड़ोसी देश को यह मालूम होना चाहिए कि कश्मीर कोई सराय नहीं है। दुश्मन के पहले भी कई बार दांत खट्टे किए हैं और अगर बुरी नजर से देश की तरफ देखा तो करारा जबाव देना हम जानते हैं। बख्शी ने कहा कि कैप्टन संजय पराशर के माध्यम से मुझे आजाद हिंद सैनिकों के परिवारों से मिलने का मौका मिला है, जिसके लिए वह दिल से उनका आभार व्यक्त करते हैं। कहा कि कैप्टन पराशर हिमाचल प्रदेश में आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है। संजय ने कोरोनाकाल में आम आदमी की जिंदगी को बचाने के लिए अपना तन-मन-धन समर्पित कर दिया। पराशर को अब लोग कोरोना महायोद्धा की संज्ञा देते हैं। ऐसा हो भी क्यों न, कैप्टन संजय ने अपने संसाधनों से करोड़ों रूपए की दवाईयां और मेडीकल उपकरण स्वास्थ्य संस्थानों में पहुंचाए थे। अब भी पराशर जी सामाजिक सरोकारों को बखूवी निभा रहे हैं। कहा कि वह लंबे समय से पराशर को जानते हैं और पता है कि समाज सेवा का जज्बा उनके खून में है। महाराष्ट्र से लेकर हिमाचल प्रदेश तक उन्होंने सामाजिक सरोकारों की नई गाथा लिखी है। इस मौके पर डा. बख्शी अपनी रेजीमेंट छठी जैक राइफल्स के पूर्व सैनिकों से संवाद भी किया और दोपहर का भोजन भी साथ किया। जैक राइफल्स के कैप्टन दिलबाग सिंह ने बताया कि पराशर के सौजन्य से उन्हें आज डा.बख्शी से मिलने का मौका प्राप्त हुआ।