शिमला,हिमशिखा न्यूज़।12/02/2023
शिमला शहर की ऐतिहासिक व सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण धरोहर टाऊन हॉल को निजी हाथों में देने के निर्णय को निरस्त करने के लिए माकपा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को खुला पत्र भेजा है । राज्य के मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में माकपा ने सरकार से जनहित को ध्यान में
रखकर तुरन्त टाऊन हाल को निजी हाथों में निजी हाथों में जाने से रोक ने की मांग उठाई है । माकपा ने कहना है कि आज़ादी के बाद से प्रशासनिक कार्यालय के लिए इस्तेमाल हो रहे टाऊन हॉल को निजी हाथों में देना पूर्ण रूप से संवैधानिक दायित्व व कानून का उल्लंघन है । । 905 में ब्रिटिश काल में बने इस भवन से शहर की चुनी हुई सरकार नगर निगम जनता के हित के लिए कार्य करती है । टाऊन हाल को निजी हाथों में देने के बाद नगर निगम शिमला के पास कोई भी अपना स्थान नहीं रह जाएगा जहां पर वह अपनी मासिक व अन्य बैठकें कर सके। मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया कि जनहित को ध्यान में रखकर तुरन्त पूर्व सरकार व नगर निगम शिमला के द्वारा टाऊन हाल व अन्य संपत्तियों को निजी हाथों में देने के निर्णय को निरस्त करें तथा हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 व भ्रष्टाचार उन्मूलन की धाराओं के तहत नगर निगम शिमला कि संपत्तियों को इस तरह से निजी हाथों में देकर क्षति पहुंचाने वालों के विरूद्ध उचित कार्रवाई करें। माकपा के जिला सचिव एवं पूर्व महापौर नगर निगम शिमला संजय चौहान ने कहा कि विश्व भर में संवैधानिक व पारम्परिक रुप से शहर के टाऊन हॉल नगर निकाय के अधिकार क्षेत्र में ही रहे हैं तथा इनमें नगर निगम अपने प्रशासनिक कार्यालय संचालित करता है। शिमला टाउन हॉल को निजी हाथों में देकर पूर्व भाजपा सरकार व निवर्तमान नगर निगम शिमला द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग कर अपने संवैधानिक दायित्व का उल्लंघन कर कानून की अवहेलना की गई है। चौहान ने कहा कि पूर्व नगर निगम शिमला द्वारा टाऊन हाल के अतिरिक्त नगर निगम शिमला की अन्य संपत्तियों जिनमें टका बेंच बुक कैफे, टूटीकंडी बहुद्देश्य परिसर आदि को भी कारोबार के लिए निजी हाथों में दिया गया है। जिससे प्रतिवर्ष नगर निगम व जनता के पैसों का लाखों रुपए का नुकसान किया गया है। जनहित में इसकी भी जांच होनी चाहिए।
राज्य के मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में यह भी अवगत करवाया गया है कि राजस्व रिकार्ड के अनुसार टाऊन हॉल का मालिकाना हक नगर निगम शिमला का है।
रिकार्ड के अनुसार 474-18 वर्ग मीटर नगर निगम शिमला का कब्जा व कार्यालय स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। टाऊन हॉल में ऊपर की मंजिल में महापौर, उपमहापौर, आयुक्त के कार्यालय व निचली मंजिल में अधिकारियों व जनसेवा के लिए विभागीय कार्यालय के अतिरिक्त नगर निगम का बैठक का कक्ष है। परन्तु वर्ष 2015 में प्रदेश सरकार ने जीर्णोद्धार हेतु इस ऐतिहासिक भवन को अपने कब्जे में ले लिया था और नगर निगम शिमला के कार्यालय को अस्थाई रूप से उपायुक्त, शिमला कार्यालय के परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया था। लम्बे समय के अंतराल के बाद वर्ष 2021 मे इसके जीर्णोद्धार का कार्य पूर्ण किया गया। उसी समय तत्कालीन भाजपा शासित नगर निगम शिमला ने प्रदेश सरकार के दबाव में आकर इसको व्यवसायिक रुप से चलाने के लिए एक प्रस्ताव पारित कर उच्च न्यायालय में एक शपथ पत्र दायर किया जिसमें इस भवन को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किसी निजी संस्थान को देने का प्रस्ताव भी सलंग्न किया गया था। यह स्पष्ट रूप से पूर्व भाजपा सरकार व निवर्तमान नगर निगम द्वारा संविधान के अंतर्गत दिए गए दायित्व का खुलेआम उलंघन है क्योंकि संविधान में सरकार व नगर निगम जैसी संवैधानिक संस्थाओं को जनता की संपत्ति की रक्षा कर उसे जनता के हितों के लिए उपयोग में लाने का दायित्व है।
माकपा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए इस पर तुरन्त कार्रवाई कर शिमला शहर की जनता की संवैधानिक, ऐतिहासिक व सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण धरोहर टाऊन हॉल को निजी हाथों में जाने से रोके।