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शिमला || सुरजीत ठाकुर

जनकल्याण सेवाओं की दक्षता और सुगम पहुंच को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार के डिजिटल तकनीक एवं शासन विभाग (डीडीटीजी) ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को राशन वितरित करने के लिए आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली की शुरुआत की है।

मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (नवाचार, डिजिटल तकनीक एवं शासन) गोकुल बुटेल ने बताया कि इस पहल के साथ हिमाचल प्रदेश इस प्रणाली को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में देश में ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश अग्रणी राज्य बना है।

बुटेल ने बताया कि अब तक लाभार्थियों का सत्यापन ओटीपी या बायोेमीट्रिक के माध्यम से किया जाता था। इन प्रक्रियाओं में एसएमएस डिलीवरी की विफलता और यूआईडीएआई में बायोेमीट्रिक मिलान में समस्याएं आती थीं, जिससे लाभार्थियों को असुविधा होने के साथ-साथ सेवा वितरण में भी विलंब भी हो रहा था। यह राज्य के उचित मूल्य की दुकान (एफपीएस) डीलरों से प्राप्त सबसे सामान्य शिकायतों में से एक थी।

उन्होंने बताया कि नई फेस अथेंटिकेशन प्रणाली इन चुनौतियों को दूर करते हुए लाभार्थियों का सत्यापन एफपीएस डीलर के स्मार्टफोन में लगे कैमरे से चेहरे की स्कैनिंग के माध्यम से करती है। यह प्रक्रिया एक सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से संचालित होती है, जिससे नेटवर्क कनेक्टिविटी या बायोमीट्रिक हार्डवेयर पर निर्भरता समाप्त हो जाती है।

उन्होंने बताया कि इस पहल के कार्यान्वयन से सत्यापन की सफलता दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और प्रक्रिया की समयबद्धता में भी भारी कमी आई है। अब लाभार्थियों को उनके हक का राशन समय पर मिल रहा है।

By HIMSHIKHA NEWS

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