Spread the love

परागपुर,हिमशिखा न्यूज़। 09/11/2021

कर्जदार नहीं फर्जदार होकर लेना चाहता हूं दुनिया से विदाई-कैप्टन संजय
-कहा, बलिदान व कुर्बानियों देने में सदा अव्वल रहा हिमाचल

कैप्टन संजय पराशर ने कहा है कि वह कर्जदार नहीं बल्कि फर्जदार होकर इस दुनिया से विदाई लेना चाहते हैं और इसी ध्येय को लेकर सामाजिक सरोकारों को निभा रहे हैं। देश, प्रदेश व जसवां-परागपुर के लिए तन-मन-धन समर्पित करके नेता जी सुभाष चंद्र बोस के सपनों को साकार करने के लिए पूरी ताकत से कार्य करते रहेंगे। मंगलवार को आजाद हिंद फौज के सैनिक परिवारों के सम्मान समारोह में पराशर ने कहा कि कोरोनाकाल में जब चीन की बदौलत हम पर मुसीबत आ गई और दूसरी लहर में हालात बद से बदतर होने लगे, तो यह ठान लिया था कि हर जान को बचाने के लिए वह भी जी-जान की बाजी लगा देगें। इसके लिए उन्होंने अपने संसाधनों का प्रयोग करने में कोई कसर बाकि नहीं छोड़ी ताकि कोई बहन विधवा न हो जाए और किसी के सिर पर से बाप का साया न उठ जाए। पराशर ने कहा कि जिदंगी में सौ बार से ज्यादा उन्होंने रक्तदान दिया है और तमन्ना है कि उनके शरीर का एक-एक अंश देश के काम आए। कहा कि बलिदान व कुर्बानियां देने में हिमाचल के वीर जवान सदैव अव्वल रहे हैं। देश में पहला परमवीर चक्र हिमाचल के मेजर सोमनाथ शर्मा काे ही मिला था। आज भी जब क्षेत्र के युवा सड़क पर सुबह व शाम को दौड़ लगाते हैं तो उनमें कैप्टन बिक्रम बतरा और सौरभ कालिया जैसा बनने की चाह व तमन्ना होती है। आज भी हिमाचली युवा भारतीय सेना में जाने के लिए कड़ा परिश्रम करते हैं। यही जज्बा बताता है कि हिमाचली देश की आन-बान व शान के लिए हर दम मर मिटने को तैयार रहते हैं। कैप्टन संजय ने कहा कि शहीद भगत सिंह उनकी जिंदगी के सबसे बड़ा प्रेरणास्त्रोत रहे हैं। भगत सिंह ने गुलाम भारत में मात्र 23 वर्ष की उम्र में फांदी के फंदे को चूम लिया था और वह आज भी आजाद भारत में अपना परिचय ढूंढ रहे हैं। आजाद हिंद फौज के सैनिक परिवारों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व लुटा दिया था। इसमें हिमाचल के वीर जवानों ने भी ऐतिहासिक योगदान दिया था। आजाद हिंद फौज के उस महान सैनिक पहाड़ी गांधी बाबा कांशी राम जी को भी काैन भूल सकता है, जिन्होंने अपने साहित्य से हिमाचल के गांव-गांव में जाकर आजादी का बिगुल बजा दिया था और देश की आजादी तक सिर्फ काले वस्त्र धारण करने का संकल्प लिया था। बाबा कांशीराम ने देश की आजादी के लिए अपना मकान तक गिरवी रख दिया था। जिला कांगड़ा, ऊना व हमीरपुर से बड़ी संख्या में आजाद हिंद फौज में सैनिक थे, जिन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में अलख जगाई। आजाद हिंद फौज के सैनिक परिवारों का सम्मान करना उनकी जिंदगी का एक सपना था और आज वह इन परिवारों को सम्मानित करके खुद को सम्मानित होता महसूस कर रहे हैं। इस मौके पर पराशर की पत्नी सोनिका पराशर ने कहा कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश शिक्षा, बागवानी, पर्यटन व कई अन्य विकास कार्यों में उन्नति करके उस मुकाम पर पहुंच गया है कि देश-विदेश में किसी पहचान का मोहताज़ नहीं है, लेकिन सच यह भी है कि देश की आज़ादी व स्वाभिमान के लिए बलिदान देकर शौर्यगाथाओं का इतिहास जो इस छोटे से पहाड़ी राज्य के सैनिकों ने दिया था, वह आज भी हम सभी के लिए प्ररेणास्त्रोत है। यही कारण है कि इस हिमाचल के हर तीसरे घर से कोई युवा देश की सेना में सेवाएं देने के लिए तैयार रहता है।

By HIMSHIKHA NEWS

हिमशिखा न्यूज़  सच्च के साथ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *