शिमला,हिमशिखा न्यूज़ 17/03/4/2022
हम तक पहुंची रूस-यूक्रेन युद्ध की आंच
युद्ध यानी विनाश और नुकसान का दूसरा नाम। बीते 24 फरवरी से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध की लपटें अब भारत की जनता को भी झुलसाने लगी हैं। जो लोग यह सोचते थे कि यहां से 5000 किलोमीटर दूर दो देशों के बीच जो कुछ चल रहा है उसका असर भारत पर नहीं होगा, उन्हें भी इस युद्ध के हम पर पड़ रहे प्रभाव अब धीरे-धीरे समझ आने लगे हैं। वैश्वीकरण के इस दौर में जब पूरी दुनिया एक छोटे टापू की तरह हो गई है, जीवन के लिए आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए एक-दूसरे से आदान-प्रदान पर निर्भर है, तो दुनिया के किसी भी कोने में होने वाले घटनाक्रम से हम भारतीय प्रभावित हुए बिना या अछूते कैसे रह सकते हैं। भारत का रूस और यूक्रेन दोनों ही देशों के साथ व्यापारिक संबंध है। यूक्रेन से खाद्य तेल व फर्टिलाइजर इत्यादि तो रूस से कच्चे ईंधन की आपूर्ति बड़ी मात्रा में करते हैं। युद्ध की परिणति के रूप में यूक्रेन व रूस में पढ़ाई कर रहे हजारों भारतीय छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है तो हमारे घर का बजट भी इस युद्ध के चलते बुरी तरह गड़बड़ा चुका है। महंगाई के लिए मचे त्राहिमाम के पीछे एक बड़ा कारण रूस-यूक्रेन युद्ध से पैदा हुए संकट को भी माना जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे ईंधन की कीमतों का सीधा असर भारत में देखने को मिल रहा है। आयात के बदले डॉलर में भुगतान, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार में कमी और उसके परिणामस्वरूप डॉलर के मुकाबले रुपये का अवमूल्यन। यानी आने वाले समय में संकट और बढ़ने वाला है, यह निश्चित है। आज झलक के पाठकों को बताते हैं 5000 किलोमीटर दूर दो देशों के बीच चल रहे तनाव के भारत पर पड़ रहे असर के बारे में…